काल्पनिक पहाड़ी रियासत कालदुर्ग कभी उत्तर और मध्य भारत के बीच एक महत्वपूर्ण छोटा साम्राज्य थी। इतिहास के अनुसार इसका अंतिम राजा अभिरुद्र देव 1798 में युद्ध में मारा गया। उसके बाद राज्य बिखर गया।
लेकिन लोककथा कहती है— राजा युद्ध में नहीं मरा। उसने मृत्यु से पहले एक ऐसा मुकुट पहना था जो उसे “दोनों दुनियाओं का शासक” बना सकता था। जीवितों का। और मृतकों का। उसने मुकुट पहना। अगली सुबह उसका शरीर नहीं मिला। सिंहासन खाली था। लेकिन किले के कई सैनिकों ने दावा किया— रात भर दरबार लगा था। और राजा मरे हुए लोगों को आदेश दे रहा था।
इसके बाद मुकुट गायब हो गया।
अब 2026 में किले के restoration project के दौरान वही मुकुट मिलता है। आर्यमित्र सिंह—एक 39 वर्षीय medieval-history specialist—उसकी पहचान के लिए बुलाया जाता है। वह राजघराने से जुड़ा नहीं माना जाता। लेकिन मुकुट पहनने के बाद… पुराने records में एक नया तथ्य सामने आता है— आर्यमित्र की माँ का परिवार… काल्डुर्ग के अंतिम royal bloodline से जुड़ा था। और शायद इसी कारण… मुकुट ने उसे “राजा” चुना।
लेकिन धीरे-धीरे पता चलता है— मुकुट को राजा नहीं चाहिए। उसे चाहिए— एक जीवित द्वार।
All Chapters
- अध्याय 1 — काला मुकुट
- अध्याय 2 — मृतकों का राजा
- अध्याय 3 — पहली कीमत
- अध्याय 4 — मृत सेना
- अध्याय 5 — महारानी का आरोप
- अध्याय 6 — सात खाली रत्न
- अध्याय 7 — जो जीवित होकर भी मृत है
- अध्याय 8 — काल्डुर्ग का असली नरसंहार
- अध्याय 9 — राज्य की कीमत
- अध्याय 10 — राजा कौन चुनता है?
- अध्याय 11 — सातवाँ रत्न
- अध्याय 12 — अंधेरे का मुकुट
