भोपाल में रहने वाला मेहरा परिवार बिल्कुल सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार दिखाई देता था।
वसुधा मेहरा, 39 वर्ष।
गृहिणी।
दो बच्चों की माँ।
सोसाइटी के WhatsApp ग्रुप में सक्रिय।
स्कूल की Parent-Teacher Meeting कभी नहीं छोड़ती।
बच्चों को क्या खाना है…
पति की कौन-सी फाइल कहाँ रखी है…
बिजली का बिल कब भरना है…
सब उसे याद रहता।
उसके पति नकुल मेहरा अक्सर मज़ाक में कहते—
“इस घर की असली इंटेलिजेंस एजेंसी तुम्हारी मम्मी ही हैं।”
बच्चे हँस देते।
क्योंकि…
उन्हें नहीं पता था…
कि यह बात मज़ाक नहीं थी।
शादी से पहले…
वसुधा का नाम सरकारी रिकॉर्ड में कुछ और था।
एक काल्पनिक गुप्त खुफिया इकाई “विशेष सुरक्षा प्रभाग” में उसे जाना जाता था—
Agent V-9 के नाम से।
वह surveillance, disguise, observation और undercover operations में विशेषज्ञ थी।
पंद्रह वर्ष पहले…
Operation Trinetra नामक मिशन के दौरान उसके साथी की मृत्यु हो गई।
मिशन विफल घोषित हुआ।
वसुधा ने एजेंसी छोड़ दी।
उसने शादी की।
परिवार बनाया।
और अपने अतीत को हमेशा के लिए बंद कर दिया।
कम से कम…
उसे यही लगा था।
अब…
उसके बेटे अद्वय के स्कूल बैग में मिली पेन ड्राइव…
उसे उस दुनिया में वापस खींच रही थी।
पेन ड्राइव में केवल एक वीडियो था।
स्क्रीन पर…
उसका वर्षों पुराना साथी दिखाई देता है।
वह कैमरे में देखकर कहता है—
“V-9…
अगर तुम यह देख रही हो…
तो Trinetra कभी खत्म नहीं हुआ था।”
वीडियो रुक जाता है।
फिर स्क्रीन पर एक लाइन दिखाई देती है—
NEXT TARGET: YOUR FAMILY
अब…
एक माँ को…
अपने परिवार से अपना अतीत भी छिपाना है…
और…
उसी परिवार को बचाना भी है।
Mission शुरू हो चुका है।
All Chapters
- अध्याय 1 — मम्मी का सीक्रेट
- अध्याय 2 — टिफिन में कोड
- अध्याय 3 — मम्मी किसका पीछा कर रही हैं?
- अध्याय 4 — ऑपरेशन त्रिनेत्र
- अध्याय 5 — पापा को शक हो गया
- अध्याय 6 — स्कूल में एजेंट
- अध्याय 7 — मम्मी गिरफ्तार
- अध्याय 8 — पापा को सच पता चला
- अध्याय 9 — मम्मी की अपनी टीम
- अध्याय 10 — एजेंट जो मर चुका था
- अध्याय 11 — आख़िरी मिशन
- अध्याय 12 — मिशन मम्मी
