काल्पनिक पहाड़ी शहर रक्तपुर के पुराने हिस्से में स्थित है—
सूर्यकोठी बंगला।
करीब 160 वर्ष पुराना।
बाहर से खूबसूरत।
अंदर से असामान्य रूप से ठंडा।
बंगले के पुराने documents में ऊपरी drawing room की एक दीवार को बार-बार अलग-अलग नामों से लिखा गया है—
“पश्चिमी द्वार”
“दूसरी खिड़की”
“छाया-कक्ष”
और सबसे पुराने register में—
“रक्त-पर्दा”
बंगले की family history में पिछले सौ वर्षों में कम से कम 11 लोग गायब हुए।
हर disappearance से पहले उन्होंने एक जैसी बात कही—
“परदे के पीछे कोई है।”
कुछ लोग वापस आए।
लेकिन उनके परिवार ने दावा किया—
वे पहले जैसे नहीं थे।
एक पति लौटा…
लेकिन पत्नी ने कहा उसकी चाल बदल चुकी थी।
एक महिला लौटी…
लेकिन उसे अपनी बेटी से कोई emotional attachment महसूस नहीं हुई।
एक teenager वापस आया…
लेकिन photographs में उसकी shadow दिखाई देना बंद हो गई।
और तीन लोगों ने लौटने के कुछ सप्ताह बाद स्वयं कहा—
“हम वापस नहीं आए थे।
कुछ और आया था।”
अब ईरा को अपनी नानी की मृत्यु के बाद बंगला विरासत में मिला है।
लेकिन उसकी असली वजह property नहीं।
तीन वर्ष पहले उसकी बहन नायरा यहीं से गायब हुई थी।
Police ने माना—
वह बंगले से बाहर चली गई होगी।
CCTV में उसका निकलना नहीं दिखा।
अब…
ईरा ने उसे परदे के पीछे देख लिया है।
All Chapters
- अध्याय 1 — लाल परदा
- अध्याय 2 — मेरी परछाई कहाँ है?
- अध्याय 3 — नायरा तीन साल बाद
- अध्याय 4 — ग्यारह लोग
- अध्याय 5 — दूसरी दुनिया
- अध्याय 6 — वह जिंदगी जो मैंने नहीं चुनी
- अध्याय 7 — वापस कौन आया?
- अध्याय 8 — परछाइयों का शहर
- अध्याय 9 — खून का परदा क्यों?
- अध्याय 10 — मेरा दूसरा रूप
- अध्याय 11 — कौन रहेगा इंसान?
- अध्याय 12 — खून का परदा
