पिता की मृत्यु के बाद अपने पुश्तैनी घर लौटे photographer अर्णव को एक रात महसूस होता है कि दीवार पर पड़ने वाला उसका साया उसकी movements को follow नहीं कर रहा। जल्द ही साया उससे अलग चलने, बंद कमरों की तरफ इशारा करने और ऐसी जगहों पर दिखाई देने लगता है जहाँ अर्णव स्वयं कभी गया ही नहीं। पिता की पुरानी diary से पता चलता है कि यही घटना उसके बचपन में भी हुई थी। लेकिन असली डर तब शुरू होता है जब परिवार की पुरानी तस्वीरों में अर्णव के साथ एक ही शरीर से निकलते दो अलग-अलग साये दिखाई देते हैं—और उनमें से एक साया शायद पिछले पंद्रह वर्षों से उसके लौटने का इंतज़ार कर रहा था।
All Chapters
- अध्याय 1 – मेरा साया रुक क्यों नहीं रहा?
- अध्याय 2 – दीवार पर दूसरा आदमी
- अध्याय 3 – उसे अपना नाम मत बताना
- अध्याय 4 – तस्वीर में दो साये
- अध्याय 5 – ईशान कौन था?
- अध्याय 6 – उस कमरे में दो बच्चे थे
- अध्याय 7 – 11:47
- अध्याय 8 – माँ हमें छोड़कर नहीं गई थीं
- अध्याय 9 – मेरा साया मेरी जिंदगी जी रहा है
- अध्याय 10 – उस रात कौन बचा था?
- अध्याय 11 – अगर तुम अर्णव हो तो मैं कौन हूँ?
- अध्याय 12 – साया
