आख़िरी अज़ान

आख़िरी अज़ान
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अपने अब्बू राशिद अंसारी की मृत्यु के बाद बत्तीस वर्षीय आरिज़ अंसारी अपनी अम्मी नुसरत और छोटी बहन सना के साथ पच्चीस साल बाद पुश्तैनी कस्बे नूराबाद लौटता है। उनके पुराने मकान के सामने एक छोटी मस्जिद वर्षों से बंद पड़ी है। बचपन में आरिज़ के चाचा रेहान उसी मस्जिद से रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हुए थे और फिर कभी नहीं मिले। पहली रात ठीक 2:17 बजे आरिज़ की नींद एक आवाज़ से खुलती है। बंद मस्जिद से अज़ान सुनाई दे रही है—लेकिन समय फ़ज्र का नहीं है। अम्मी का चेहरा सफेद पड़ जाता है, क्योंकि वह आवाज़ रेहान की है। अज़ान खत्म होने के बाद वही आवाज़ एक ऐसा वाक्य कहती है जो अज़ान का हिस्सा नहीं—“राशिद चला गया… अब सच बताने वाला कौन बचा है?”

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