अपनी माँ की मृत्यु के बाद 35 वर्षीय forensic photographer कबीर सक्सेना छब्बीस साल बाद अपने पुश्तैनी घर लौटता है। घर के पीछे की पुरानी दीवार पर उसे दर्जनों अजीब निशान दिखाई देते हैं—हथेलियाँ, scratches, छोटी lines और मिट्टी के footprints। उसकी मौसी बताती हैं कि ये निशान उसकी नौ वर्षीय बहन अन्वी के गायब होने के बाद हर साल उसी तारीख की रात अपने आप दिखाई देते रहे। लेकिन पिछले साल पहली बार कोई नया निशान नहीं आया। सबसे अंतिम निशान के नीचे किसी ने लिखा था—“अब तुम।” उसी रात कबीर के कमरे की दीवार पर एक गीला handprint उभरता है। उसकी छोटी उँगली आधी है—ठीक अन्वी की तरह। कबीर को बचपन की केवल एक बात याद है: अन्वी गायब होने से कुछ घंटे पहले उससे कह रही थी—“अगर मैं रास्ता भूल गई तो निशान देखते हुए मुझे ढूँढ लेना।”
All Chapters
- अध्याय 1 – वो आख़िरी निशान
- अध्याय 2 – दीवार पर उसका हाथ
- अध्याय 3 – अगर मैं खो जाऊँ तो निशान देखना
- अध्याय 4 – अन्वी उस रात कहाँ गई थी?
- अध्याय 5 – पहला निशान झूठ बोल रहा था
- अध्याय 6 – माँ ने पाँच निशान खुद बनाए थे
- अध्याय 7 – छठा निशान किसने बनाया?
- अध्याय 8 – सारे निशान एक रास्ता हैं
- अध्याय 9 – अन्वी उस रात मरी नहीं थी
- अध्याय 10 – माँ उससे मिल चुकी थीं
- अध्याय 11 – मुझे ढूँढने में बहुत देर कर दी, भैया
- अध्याय 12 – एक निशान अभी बाकी था
