एक घर, दो पत्नियाँ

एक घर, दो पत्नियाँ
Text size
👁 2,568 views
सात साल की शादी के बाद अनन्या को लगता है कि वह अपने पति आदित्य और छह वर्षीय बेटी तारा के साथ एक सामान्य खुशहाल जिंदगी जी रही है। लेकिन आदित्य के पिता की मृत्यु के बाद परिवार को पुश्तैनी घर लौटना पड़ता है। गृहप्रवेश की पहली शाम दरवाजे पर एक महिला अपने आठ वर्षीय बेटे के साथ आती है। उसके हाथ में उसी घर की पुरानी चाबी है। वह अंदर आकर आदित्य को देखती है और कहती है—“तुमने इन्हें बताया नहीं कि इस घर की पहली बहू मैं हूँ?” महिला का नाम मीरा है। उसके पास आदित्य के साथ विवाह की तस्वीरें और marriage certificate दोनों हैं। वह पति वापस लेने नहीं, अपना घर और अपने बेटे तक पहुँच चुका झूठ लेने आई है। असली सवाल यह नहीं कि आदित्य किस पत्नी को चुनेगा—सवाल यह है कि जब एक आदमी के छिपाए फैसलों, परिवार की आधी सच्चाइयों और एक अधूरी तलाक की फाइल ने दो महिलाओं की जिंदगी बदल दी हो, तो सच सामने आने के बाद वे अपनी जिंदगी के बारे में क्या चुनेंगी।

All Chapters

Leave a Reply

Scroll to Top