सात साल की शादी के बाद अनन्या को लगता है कि वह अपने पति आदित्य और छह वर्षीय बेटी तारा के साथ एक सामान्य खुशहाल जिंदगी जी रही है। लेकिन आदित्य के पिता की मृत्यु के बाद परिवार को पुश्तैनी घर लौटना पड़ता है। गृहप्रवेश की पहली शाम दरवाजे पर एक महिला अपने आठ वर्षीय बेटे के साथ आती है। उसके हाथ में उसी घर की पुरानी चाबी है। वह अंदर आकर आदित्य को देखती है और कहती है—“तुमने इन्हें बताया नहीं कि इस घर की पहली बहू मैं हूँ?” महिला का नाम मीरा है। उसके पास आदित्य के साथ विवाह की तस्वीरें और marriage certificate दोनों हैं। वह पति वापस लेने नहीं, अपना घर और अपने बेटे तक पहुँच चुका झूठ लेने आई है। असली सवाल यह नहीं कि आदित्य किस पत्नी को चुनेगा—सवाल यह है कि जब एक आदमी के छिपाए फैसलों, परिवार की आधी सच्चाइयों और एक अधूरी तलाक की फाइल ने दो महिलाओं की जिंदगी बदल दी हो, तो सच सामने आने के बाद वे अपनी जिंदगी के बारे में क्या चुनेंगी।
All Chapters
- अध्याय 1 – एक घर, दो पत्नियाँ
- अध्याय 2 – ये शादी की तस्वीर किसकी है?
- अध्याय 3 – तलाक हुआ ही नहीं था
- अध्याय 4 – मीरा वापस क्यों आई?
- अध्याय 5 – इस घर में सब जानते थे
- अध्याय 6 – कबीर किसका बेटा है?
- अध्याय 7 – दो लोगों को दो अलग सच
- अध्याय 8 – वो पत्र जो कभी नहीं पहुँचा
- अध्याय 9 – राघव की आख़िरी डायरी
- अध्याय 10 – आदित्य का चुनाव
- अध्याय 11 – अनन्या का निर्णय
- अध्याय 12 – कागज़ पूरा होता है
