एक किताब… हज़ार सवाल
पुरानी शहर लाइब्रेरी…जहाँ वर्षों से…कोई नई किताब नहीं आई थी।एक दिन…इतिहास शोधकर्ता शौर्य वर्मा को…धूल से ढकी…बिना नाम वाली…एक पुरानी […]
पुरानी शहर लाइब्रेरी…जहाँ वर्षों से…कोई नई किताब नहीं आई थी।एक दिन…इतिहास शोधकर्ता शौर्य वर्मा को…धूल से ढकी…बिना नाम वाली…एक पुरानी […]
पुरानी हवेली…जिसे वर्षों बाद…बेचा जा रहा था।सफाई के दौरान…एक लकड़ी की अलमारी के पीछे…एक पीला पड़ा लिफाफा मिला।उस पर लिखा
एक छोटे से गाँव…जहाँ बच्चे…सपने तो देखते थे…लेकिन उन्हें पूरा करने का रास्ता नहीं जानते थे। उसी गाँव के सरकारी
दस साल पहले…एक छोटे शहर में…एक ही रात में…चार लोगों की रहस्यमयी मौत हो गई।पुलिस ने…इसे हादसा मानकर…फाइल बंद कर
कॉलेज की लाइब्रेरी…जहाँ…एक किताब…दो हाथों ने…एक साथ उठाई। एक हाथ…अर्णव राजदान का।दूसरा…ईशिता सैनी का। एक छोटी-सी मुलाकात…धीरे-धीरे…दोस्ती में बदली।दोस्ती…मोहब्बत में।और…मोहब्बत…ज़िंदगी
पुराने शहर की…एक भूली हुई लाइब्रेरी…जहाँ वर्षों से…कोई नहीं गया था।धूल से ढकी…टूटी हुई अलमारियों के बीच…नक्ष अरोड़ा को…एक काली
एक बारिश भरी शाम…रेलवे स्टेशन के प्लेटफ़ॉर्म नंबर पाँच पर…विहान अरोड़ा की नज़र…एक लड़की पर पड़ी।वह अकेली थी…भीगी हुई…डरी हुई…और
बारह साल पहले…एक प्रतिष्ठित परिवार…एक ही रात में बिखर गया। एक हत्या…एक कथित आत्महत्या…और अदालत का अंतिम फैसला।फाइल बंद हो
अन्वी राठौर…एक सफल आर्किटेक्ट…जिसकी ज़िंदगी बिल्कुल सामान्य थी।एक प्यार करने वाला परिवार…अच्छा करियर…और जल्द होने वाली शादी। लेकिन…एक सड़क दुर्घटना
हर सुबह…ठीक आठ बजे…शहर के एक पुराने बस स्टॉप पर…दो अजनबी…बिना कुछ कहे…एक-दूसरे को देखते थे।ना कोई परिचय…ना कोई बातचीत…सिर्फ़