Drama

वसीयत का सच

वसीयत का सच

दादा…ठाकुर हरिदेव सिंह…पूरे गाँव की सबसे सम्मानित शख्सियत थे।उनकी हवेली…सिर्फ़ एक घर नहीं…बल्कि…पूरे परिवार की पहचान थी। उनके निधन के […]

वो लड़की सिर्फ़ रात में दिखती थी

वो लड़की सिर्फ़ रात में दिखती थी

रात के…ठीक बारह बजे…पुराने रेलवे पुल पर…एक लड़की दिखाई देती थी।सफेद कपड़े…हाथ में पुरानी लालटेन…और…चेहरे पर…एक अजीब-सी मुस्कान। वह…हर रात…उसी

मेरी पत्नी का गुप्त अतीत

मेरी पत्नी का गुप्त अतीत

शादी को…सिर्फ़ सात महीने हुए थे।दक्ष को लगता था…उसकी ज़िंदगी अब पूरी हो चुकी है।आहाना…उसकी मुस्कान की वजह थी। लेकिन…एक

चेहरे के पीछे का कातिल

चेहरे के पीछे का कातिल

शहर में…आठ महीनों के भीतर…आठ हत्याएँ हो चुकी थीं।हर बार…लाश के पास…एक सफेद मुखौटा रखा मिलता था।ना उंगलियों के निशान…ना

खोया हुआ बेटा

खोया हुआ बेटा

पच्चीस साल पहले…एक धार्मिक मेले की भीड़ में…सिर्फ़ पाँच साल का…आर्यवीर सिंह…अचानक गायब हो गया।पूरे शहर में…उसकी तलाश हुई।पोस्टर लगे…इनाम

खामोश ज़िंदगी का शोर

खामोश ज़िंदगी का शोर

हर सुबह…अद्वैत शर्मा…समय पर ऑफिस जाता था।सबको मुस्कुराकर मिलता था।हर किसी की मदद करता था।लोग कहते थे…“इससे खुश इंसान हमने

एक ही इंसान... कई ज़िंदगियाँ

एक ही इंसान… कई ज़िंदगियाँ

दिल्ली…मुंबई…जयपुर…देहरादून…चार शहर…चार अलग नाम…चार अलग ज़िंदगियाँ…लेकिन…चेहरा…एक ही था। दिल्ली में…वह आदित्य मल्होत्रा था।मुंबई में…विवान अरोड़ा।जयपुर में…अर्जुन राठौड़।और…देहरादून में…समर्थ कपूर। हर

होटल रूम 309

होटल रूम 309

शहर का…सबसे पुराना…और सबसे आलीशान होटल।होटल ग्रैंड क्राउन। लेकिन…उसकी तीसरी मंज़िल पर…एक कमरा था…रूम 309। बीस सालों से…उस कमरे के

आधी रात की दुल्हन

आधी रात की दुल्हन

शहर से करीब पचास किलोमीटर दूर एक पुरानी सड़क थी।लोग कहते थे रात के बारह बजे वहाँ लाल जोड़े में

जिसने मुझे तोड़ा... मैंने उसकी दुनिया तोड़ दी

जिसने मुझे तोड़ा… मैंने उसकी दुनिया तोड़ दी

दस साल पहले…रुद्रांश देव…सब कुछ खो चुका था।उसका परिवार…उसका करियर…उसकी पहचान…सब कुछ…एक ऐसी साज़िश में…खत्म कर दिया गया…जिसका कोई सबूत…कभी

Scroll to Top