मोहब्बत की आख़िरी बाज़ी
पाँच साल पहले…अर्णव राजदेव ने…काव्या त्रिवेदी से कहा था—“अगर मैं लौटकर आया… तो हमारी कहानी पूरी होगी।”लेकिन…उसी रात…वह गायब हो […]
पाँच साल पहले…अर्णव राजदेव ने…काव्या त्रिवेदी से कहा था—“अगर मैं लौटकर आया… तो हमारी कहानी पूरी होगी।”लेकिन…उसी रात…वह गायब हो […]
सौ साल पुरानी “राजमहल हवेली” हमेशा से सिर्फ़ एक घर नहीं थी।वह इस परिवार की पहचान थी।उसके आँगन में चार
शहर के सबसे प्रतिष्ठित उद्योगपति…राजवीर मल्होत्रा की बेटी…आन्या की शादी पूरे शहर की सबसे चर्चित शादी बनने वाली थी।हज़ारों निमंत्रण-पत्र
माँ के गुज़रे…बारह साल हो चुके थे।घर की दीवार पर…उनकी मुस्कुराती हुई…एक बड़ी तस्वीर टंगी थी। हर त्योहार…हर खुशी…हर दुख…उसी
सिंघानिया परिवार…देश के सबसे पुराने…और सबसे अमीर कारोबारी परिवारों में से एक था।अरबों की संपत्ति…कई फैक्ट्रियाँ…हज़ारों एकड़ ज़मीन…और…सदियों पुरानी हवेली।
बचपन से…हर रात…विवान चौधरी…एक ही सपना देखता था। एक पुराना रेलवे स्टेशन…बारिश…लाल छाता लिए…एक छोटी बच्ची…और…दूर खड़ा…एक सफेद कोट पहने
बरसों पुरानी…धूल से ढकी…एक काली डायरी…पुरानी हवेली के तहखाने से मिली।उसके पहले पन्ने पर…सिर्फ़ एक पंक्ति लिखी थी—“अगर तुम यह
हर सुबह…आर्यव…सबसे पहले मुस्कुराता था। ऑफिस में…दोस्तों के बीच…परिवार के सामने…हर जगह…उसके चेहरे पर…बस मुस्कान रहती थी।लोग कहते थे…“यार… इससे
नैरा सिंह…प्यार पर…दोबारा भरोसा करना भूल चुकी थी।एक असफल रिश्ते ने…उसे भीतर तक तोड़ दिया था। फिर…उसकी ज़िंदगी में…अगस्त्य राजदेव
बाईस साल पहले…एक पहाड़ी मेले में…आठ साल का…अभिमन्यु चौहान…अचानक गायब हो गया। पुलिस…रिश्तेदार…पूरा गाँव…उसे खोजता रहा।लेकिन…वह कभी नहीं मिला।समय बीतता