पुराना केस
साल 1999…शहर के सबसे प्रतिष्ठित परिवार “प्रताप निवास” में एक ऐसी रात आई…जिसने पूरे शहर को हिला दिया।परिवार के बड़े […]
साल 1999…शहर के सबसे प्रतिष्ठित परिवार “प्रताप निवास” में एक ऐसी रात आई…जिसने पूरे शहर को हिला दिया।परिवार के बड़े […]
दादाजी की वसीयत…पढ़ी जा रही थी।पूरा परिवार…एक ही कमरे में बैठा था।तभी…वकील ने…पुरानी फ़ाइल से…एक पीला पड़ा हुआ…शादी का प्रमाणपत्र
जयपुर के ऐतिहासिक “राजमहल पैलेस” में…देश की सबसे चर्चित शादियों में से एक होने वाली थी।उद्योगपति आर्यवर्धन चौधरी की बेटी…अनन्या…और
अरावली की पहाड़ियों के बीच बसे सूर्यगढ़ गाँव में एक ऐसा कुआँ था जिसके पास सूर्यास्त के बाद कोई नहीं
दादा जी की…तेरहवीं भी पूरी नहीं हुई थी…कि घर के बाहर…एक काली कार आकर रुकी।उसमें से…सफेद बालों वाला…एक बुज़ुर्ग वकील
रात के…दो बजकर सत्रह मिनट हुए थे।राजधानी के सबसे सुरक्षित सरकारी आवास के बाहर…अचानक दर्जनों काली गाड़ियाँ आकर रुकीं।हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों
पंद्रह साल पहले…एक फैसला लिया गया था।उस फैसले ने किसी की जान नहीं ली…लेकिन कई ज़िंदगियाँ अधूरी कर दीं। समय
पिता की मृत्यु को…सिर्फ़ दस दिन हुए थे।परिवार अभी…उनके जाने के दुख से…उबर भी नहीं पाया था।तभी…बैंक से फोन आया।उनके
शहर की सबसे शांत कॉलोनी…एक सुबह…चीखों से गूंज उठी।व्यापारी राघव अरोड़ा अपने कमरे में मृत मिला।कमरे का दरवाज़ा अंदर से
अनामिका सक्सेना…पचास वर्ष की उम्र में…अपने ही घर में मेहमान जैसी महसूस करने लगी थी। बच्चे अपनी दुनिया में व्यस्त