Film City के बाहर
मुंबई…जहाँ हर सुबह…हजारों नए सपने जन्म लेते हैं…और हर शाम…सैकड़ों सपने टूट जाते हैं। उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर […]
मुंबई…जहाँ हर सुबह…हजारों नए सपने जन्म लेते हैं…और हर शाम…सैकड़ों सपने टूट जाते हैं। उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर […]
साठ साल की शादी…हजारों सुबहें…लाखों बातें…और अनगिनत यादें… दादाजी हरिनारायण जोशी और दादी सावित्री जोशी की शादी को पूरे 60
घने जंगल…ऊँचे पहाड़…नदियों की कलकल…और उन्हीं के बीच बसा था एक छोटा-सा आदिवासी गाँव महुआगढ़। यहाँ रहने वाले लोगों के
लोग कहते थे…“एक आदमी दुनिया नहीं बदल सकता।”लेकिन…एक आदमी…एक साइकिल…और कुछ पुरानी किताबों ने पूरे इलाके की सोच बदल दी।
शादी को अभी सिर्फ़ तीन दिन हुए थे…पूरा परिवार नई बहू अनन्या के आने की खुशियों में डूबा था।लेकिन पहली
कभी-कभी…भगवान हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर वैसे नहीं देते…जैसा हम चाहते हैं।बल्कि वैसे देते हैं…जैसा हमारे लिए सबसे अच्छा होता है।
साल 1998…जब मोबाइल हर हाथ में नहीं था…और एक फोन कॉल…पूरे दिन की सबसे बड़ी खुशी होती थी। दिल्ली में
शहर से लगभग दस किलोमीटर दूर…घने जंगलों के बीच…एक टूटा हुआ पुल था…जिसे लोग वर्षों से “पुराना पुल” कहते थे।दिन
कहते हैं…शहर इंसान को काम करना सिखाता है…लेकिन गाँव उसे इंसान बनना सिखाता है। दिल्ली में नौकरी न मिलने के
आज की मुंबई…गगनचुंबी इमारतों…लोकल ट्रेनों…फिल्मों…और करोड़ों सपनों का शहर है। लेकिन…हर चमकती सड़क के नीचे…एक ऐसा इतिहास दफन है…जिसे कभी