विरासत और जिम्मेदारी
सौ साल पुरानी “राजमहल हवेली” हमेशा से सिर्फ़ एक घर नहीं थी।वह इस परिवार की पहचान थी।उसके आँगन में चार […]
सौ साल पुरानी “राजमहल हवेली” हमेशा से सिर्फ़ एक घर नहीं थी।वह इस परिवार की पहचान थी।उसके आँगन में चार […]
शहर के सबसे प्रतिष्ठित उद्योगपति…राजवीर मल्होत्रा की बेटी…आन्या की शादी पूरे शहर की सबसे चर्चित शादी बनने वाली थी।हज़ारों निमंत्रण-पत्र
माँ के गुज़रे…बारह साल हो चुके थे।घर की दीवार पर…उनकी मुस्कुराती हुई…एक बड़ी तस्वीर टंगी थी। हर त्योहार…हर खुशी…हर दुख…उसी
सिंघानिया परिवार…देश के सबसे पुराने…और सबसे अमीर कारोबारी परिवारों में से एक था।अरबों की संपत्ति…कई फैक्ट्रियाँ…हज़ारों एकड़ ज़मीन…और…सदियों पुरानी हवेली।
बचपन से…हर रात…विवान चौधरी…एक ही सपना देखता था। एक पुराना रेलवे स्टेशन…बारिश…लाल छाता लिए…एक छोटी बच्ची…और…दूर खड़ा…एक सफेद कोट पहने
हर सुबह…आर्यव…सबसे पहले मुस्कुराता था। ऑफिस में…दोस्तों के बीच…परिवार के सामने…हर जगह…उसके चेहरे पर…बस मुस्कान रहती थी।लोग कहते थे…“यार… इससे
बाईस साल पहले…एक पहाड़ी मेले में…आठ साल का…अभिमन्यु चौहान…अचानक गायब हो गया। पुलिस…रिश्तेदार…पूरा गाँव…उसे खोजता रहा।लेकिन…वह कभी नहीं मिला।समय बीतता
दादा…ठाकुर हरिदेव सिंह…पूरे गाँव की सबसे सम्मानित शख्सियत थे।उनकी हवेली…सिर्फ़ एक घर नहीं…बल्कि…पूरे परिवार की पहचान थी। उनके निधन के
पच्चीस साल पहले…एक धार्मिक मेले की भीड़ में…सिर्फ़ पाँच साल का…आर्यवीर सिंह…अचानक गायब हो गया।पूरे शहर में…उसकी तलाश हुई।पोस्टर लगे…इनाम
हर सुबह…अद्वैत शर्मा…समय पर ऑफिस जाता था।सबको मुस्कुराकर मिलता था।हर किसी की मदद करता था।लोग कहते थे…“इससे खुश इंसान हमने