दिल्ली की सर्द हवाओं से बहुत दूर, मध्य भारत के एक छोटे-से शहर सागर में, जहाँ चंबल नदी की लहरें हर शाम को पुरानी कहानियाँ सुनाती हैं, वहाँ रहती थी आरुषि।
उसकी ज़िंदगी किताबों की महक, पिता की सलाहों और छोटी-छोटी खुशियों में सिमटी हुई थी। लेकिन एक बारिश भरी शाम, जब लाइब्रेरी के बाहर उसकी मुलाकात एक अजनबी से हुई, तो सब कुछ बदल गया।
वह अजनबी – लंबा कद, काली जैकेट, गहरी आँखें और होंठों पर एक ऐसी मुस्कान जो रहस्य छिपाए हुए थी। नाम था उसका अर्जुन।
मुलाकात छोटी-सी थी, बस एक टकराव, माफी और एक पल की नज़रें मिलना। लेकिन उसी पल में अर्जुन ने आरुषि को एक पुराना, चाँदी का लॉकेट थमाया था – बिना किसी वजह के, बिना किसी बात के।
“ये तुम्हारे लिए,” उसने कहा था, और फिर बारिश में गायब हो गया।
लॉकेट के पीछे एक छोटा-सा नक्काशीदार कोड था, जैसे कोई पुराना संदेश। आरुषि ने उसे पहन लिया, सोचा शायद कोई संयोग है। लेकिन अगले कुछ दिनों में वही लॉकेट उसके जीवन का सबसे बड़ा रहस्य बन गया।
कभी अनजान चिट्ठियाँ लाइब्रेरी की किताबों में छिपी मिलतीं – “उस लॉकेट को मत पहनो।”
कभी रात को घर के बाहर कोई छाया खड़ी दिखती।
कभी अर्जुन की आँखों में वो दर्द और डर, जो वो छिपाने की कोशिश करता।
आरुषि को समझ नहीं आता था – क्या अर्जुन सच में एक फोटोग्राफर था, जो शहर की तस्वीरें खींचने आया था?
या फिर वो कोई जासूस था, जिसका मकसद कुछ और था?
और सबसे बड़ा सवाल – वो लॉकेट किसका था? क्यों अर्जुन ने उसे दिया? और क्यों उस लॉकेट के साथ ही उसके जीवन में खतरे की परछाइयाँ बढ़ने लगीं?
अजनबी का लॉकेट एक ऐसी कहानी है, जहाँ प्यार की हर धड़कन के साथ-साथ रहस्य की साँसें भी तेज़ होती जाती हैं।
यहाँ रोमांस की मिठास है, विश्वासघात का दर्द है, पुराने दुश्मनों की साज़िशें हैं, और एक लॉकेट जो सब कुछ जोड़ता है – या शायद तोड़ भी सकता है।
क्या आरुषि उस लॉकेट के राज़ को सुलझा पाएगी?
क्या अर्जुन का प्यार सच होगा, या सिर्फ़ एक बहाना?
और जब सारे रहस्य खुलेंगे, तो क्या बचेगा – प्यार, या सिर्फ़ टूटे हुए सपने?
डूब जाइए इस suspense, drama और रोमांस की दुनिया में… क्योंकि कभी-कभी एक छोटा-सा लॉकेट पूरी ज़िंदगी बदल देता है।
