आगे बढ़ने से पहले:
इस कहानी में ऐसे विषय और भाषा-शैली हो सकती है जो हर पाठक के लिए सहज न हो।
कृपया अपनी समझ और विवेक से आगे बढ़ें।
शिमला की ठंडी पहाड़ियों में छिपी एक पुरानी कोठी।
बारिश की वो रात, जब हवा में सिर्फ़ पानी नहीं, बल्कि पुराने अपराधों की सिसकियाँ भी घुली हुई थीं।
एक रिटायर्ड IAS अधिकारी की डायरी, जिसके पन्नों पर काले स्याही से नहीं, बल्कि सूखे हुए खून से कुछ लिखा गया था — या शायद लिखा ही नहीं गया था, बस महसूस किया गया था।
“मैंने गलती की।”
बस इतने तीन शब्द।
फिर एक गोली।
फिर एक परिवार जो टूटने के कगार पर था।
और एक इंस्पेक्टर, जो सच को बाहर लाने के लिए तैयार थी — चाहे उस सच की कीमत कुछ भी हो।
क्या सच सचमुच कभी मरता है?
या वो सिर्फ़ इंतज़ार करता है — किसी बारिश की रात का, किसी खुली खिड़की का, और किसी ठंडी नस्ल की…
खून से सनी डायरी
एक ऐसी कहानी, जहाँ हर पन्ना एक राज़ छिपाए हुए है,
और आखिरी पन्ना… आपकी साँसें रोक लेगा।
