हर शादी…
नई ज़िंदगी की शुरुआत होती है।
लेकिन आरव मल्होत्रा और काव्या शर्मा के लिए…
शादी का पहला सफर…
मौत की उलटी गिनती बन गया।
शादी के दो दिन बाद दोनों पहाड़ों की ओर निकलते हैं।
रास्ते में उन्हें एक वीरान हाईवे, रहस्यमयी ढाबा और एक अजनबी बुज़ुर्ग मिलता है।
जाते-जाते वह सिर्फ़ एक बात कहता है—
“सूरज डूबने से पहले उस रास्ते को छोड़ देना… वरना वापस कोई नहीं आता।”
दोनों इसे अंधविश्वास समझकर आगे बढ़ जाते हैं।
लेकिन कुछ किलोमीटर बाद…
GPS काम करना बंद कर देता है।
मोबाइल नेटवर्क गायब हो जाता है।
और उन्हें महसूस होता है…
कि कोई उनकी कार का पीछा कर रहा है।
अगली सुबह…
उनकी कार सड़क किनारे मिलती है।
कार का इंजन चालू होता है।
दरवाज़े खुले होते हैं।
लेकिन…
दूल्हा-दुल्हन दोनों गायब होते हैं।
यहीं से शुरू होती है एक ऐसी जांच…
जो सिर्फ़ एक लापता जोड़े की नहीं…
बल्कि कई वर्षों से गायब हुए लोगों की अनसुलझी कहानियों तक पहुँचती है।
अब सवाल था—
आरव और काव्या के साथ क्या हुआ?
क्या वह हादसा था…
या पहले से रची गई साजिश?
और उस सुनसान रास्ते पर आखिर ऐसा कौन था…
जो हर नए जोड़े का इंतजार कर रहा था?
