कुछ चीजें सिर्फ पुरानी नहीं होतीं…
वो अपने अंदर किसी के अधूरे सपने, टूटे हुए वादे और बीते वक्त की आवाज़ें संभालकर रखती हैं।
राजस्थान के पुराने कस्बे केसरगढ़ में बनी राजावत परिवार की पुश्तैनी हवेली कई सालों से बंद पड़ी थी।
शहर में रहने वाला विहान राजावत जब वर्षों बाद उस हवेली में वापस आया, तो उसका मकसद सिर्फ पुरानी चीज़ों को समेटना था।
लेकिन उसे नहीं पता था कि उसी हवेली में उसका इंतजार कर रही थी एक ऐसी कहानी…
जिसे तीन पीढ़ियों से छुपाकर रखा गया था।
पुराने कमरे की अलमारी में उसे मिली उसके परदादा भैरव प्रताप राजावत की काली छतरी।
परिवार में उस छतरी को लेकर हमेशा एक बात कही जाती थी—
“मौसम कितना भी बदल जाए… लेकिन इस छतरी को कभी मत खोलना।”
विहान को यह सब सिर्फ पुरानी सोच लगी।
लेकिन जब कई सालों बाद पहली बारिश में उसने वह छतरी खोली…
तो उसके अंदर से गिरा एक पुराना खत।
एक ऐसा खत जो लिखा गया था वैदेही ठाकुर के नाम।
उस खत ने भैरव प्रताप राजावत की जिंदगी का वह सच सामने लाना शुरू किया जिसे परिवार ने हमेशा एक राज़ बनाकर रखा था।
एक अधूरी मोहब्बत…
एक निभाया हुआ वादा…
और एक ऐसा फैसला जिसने आने वाली तीन पीढ़ियों की किस्मत बदल दी।
अब विहान के सामने सवाल था—
क्या वह अपने परदादा के पुराने वादे को पूरा करेगा?
या उस सच को फिर से उसी छतरी में बंद कर देगा जहाँ वह बरसों से कैद था?
All Chapters
- अध्याय 1 – हवेली की वापसी और छतरी का स्पर्श
- अध्याय 2 – पहला खत और बारिश की पहली रात
- अध्याय 3 – दादी जानकी का मौन और पुरानी यादें
- अध्याय 4 – केसरगढ़ की धूल में छुपी वैदेही की कहानी
- अध्याय 5 – अधूरी मोहब्बत की पहली झलक
- अध्याय 6 – वादे की कीमत और परिवार का राज़
- अध्याय 7 – काव्या का साथ और गहरे रहस्य की तह
- अध्याय 8 – तीन पीढ़ियों का बोझ और टूटते रिश्ते
- अध्याय 9 – आखिरी मौसम की तैयारी
- अध्याय 10 – छतरी का अंतिम खुलना और विरासत का फैसला
