गुप्त शादी

गुप्त शादी
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दादाजी की वसीयत…
पढ़ी जा रही थी।
पूरा परिवार…
एक ही कमरे में बैठा था।
तभी…
वकील ने…
पुरानी फ़ाइल से…
एक पीला पड़ा हुआ…
शादी का प्रमाणपत्र निकाला।

कमरे में…
सन्नाटा छा गया।
क्योंकि…
उस प्रमाणपत्र पर…
परिवार के एक ऐसे सदस्य का नाम था…
जिसकी…
कभी शादी हुई ही नहीं थी।
और…
उस शादी की तारीख़…
आज से…
तीस साल पुरानी थी।

वसीयत का अगला वाक्य था—
“जब तक इस शादी का सच सामने नहीं आएगा… तब तक विरासत का एक भी हिस्सा किसी को नहीं मिलेगा।”

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