जयपुर के बाहरी इलाके में स्थित राजविलास हवेली वर्षों से बंद पड़ी थी। लोग कहते थे उसकी सबसे पिछली दीवार ज़िंदा है। हर रात 2:18 से 2:23 बजे के बीच वहीं से किसी के मदद माँगने की आवाज़ सुनाई देती।
जब हवेली खरीदने आए एक बिल्डर की उसी कमरे में रहस्यमय मौत हो जाती है, तो जांच की जिम्मेदारी मिलती है एसीपी समर राठौड़ को। उनके साथ आर्किटेक्चरल इतिहासकार अन्वी शेखावत और फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. नक्ष मेहरा इस रहस्य की तह तक पहुँचने निकलते हैं।
लेकिन जैसे-जैसे दीवार का सच सामने आता है, उन्हें एहसास होता है कि दीवार के पीछे कोई इंसान नहीं, बल्कि एक ऐसा अपराध कैद है जिसे कई ताकतवर लोग हमेशा के लिए छिपाना चाहते हैं।
