मध्यप्रदेश के घने जंगलों के बीच स्थित सन्नाटापुर गाँव सालों से दुनिया से कटा हुआ था। गाँव में सूरज ढलते ही हर दरवाज़ा बंद हो जाता। बुज़ुर्ग बच्चों को एक ही बात सिखाते—
“अगर रात में कोई तुम्हारा नाम लेकर बुलाए… तो पीछे मत देखना…”
लेकिन युवा लेखक आर्यमान शुक्ला इन कहानियों को अंधविश्वास समझता था। वह एक किताब लिखने के लिए गाँव पहुँचता है। पहली ही रात 3:03 बजे उसे वही आवाज़ सुनाई देती है—
“आर्यमान… मुझे चाहो…”
और उसी क्षण उसकी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल जाती है।
All Chapters
- अध्याय 1 — पहली पुकार
- अध्याय 2 — सन्नाटे की आवाज़
- अध्याय 3 — सफेद परछाई
- अध्याय 4 — आधी रात का जंगल
- अध्याय 5 — श्राप की शुरुआत
- अध्याय 6 — खून से लिखा मंत्र
- अध्याय 7 — चाहत या मौत
- अध्याय 8 — आत्माओं का कुआँ
- अध्याय 9 — अंतिम अनुष्ठान
- अध्याय 10 — उसका असली चेहरा
- अध्याय 11 — सन्नाटे का श्राप
- अध्याय 12 — सन्नाटे की चाहत
