अपनी माँ की मृत्यु के बाद 31 वर्षीय children’s-book illustrator अनिरुद्ध अवस्थी अपनी पत्नी नैना और सात वर्षीय बेटी तारा के साथ भोपाल के बाहर स्थित पुश्तैनी हवेली लौटता है।
घर के बंद attic में तारा को काले कपड़े से बनी एक पुरानी गुड़िया मिलती है, जिसकी एक आँख लाल धागे से सिली हुई है। अनिरुद्ध उसे देखते ही बिना कारण घबरा जाता है।
उसी रात तारा बताती है कि गुड़िया का नाम “मीशा” है और वह कह रही है—
“पापा से पूछो, उन्होंने मुझे अलमारी में क्यों बंद किया था।”
समस्या यह है कि अनिरुद्ध ने अपनी जिंदगी में कभी मीशा नाम की किसी बच्ची को नहीं जाना।
लेकिन अगली सुबह उसे अपनी बचपन की handwriting में एक पुरानी drawing मिलती है—दो बच्चे हाथ पकड़े हैं, बीच में वही काली गुड़िया है और नीचे लिखा है—
अनु + मीशा + काली = हमेशा साथ।
All Chapters
- अध्याय 1 – काली गुड़िया
- अध्याय 2 – इसका नाम मीशा है
- अध्याय 3 – इस घर में कोई मीशा नहीं थी
- अध्याय 4 – मैंने उसे अलमारी में बंद किया था
- अध्याय 5 – आग वाली रात
- अध्याय 6 – गुड़िया की लाल आँख
- अध्याय 7 – हम बचपन में दो थे
- अध्याय 8 – मीशा आग में नहीं मरी थी
- अध्याय 9 – माँ ने उसका नाम क्यों मिटाया?
- अध्याय 10 – उस रात अलमारी किसने बंद की थी?
- अध्याय 11 – मीशा कहाँ गई थी?
- अध्याय 12 – काली गुड़िया
