घरेलू जेल
बाहर से अभिज्ञा का परिवार एक आदर्श भारतीय घर जैसा लगता है — सम्मानित पति, देखभाल करने वाली सास, दो […]
बाहर से अभिज्ञा का परिवार एक आदर्श भारतीय घर जैसा लगता है — सम्मानित पति, देखभाल करने वाली सास, दो […]
“दूसरी मोहब्बत” एक भावुक और प्रेरणादायक हिंदी उपन्यास है जो परिपक्व उम्र में प्रेम, आत्मसम्मान और जीवन की दूसरी शुरुआत
सुषमा वर्मा, ३९ वर्षीय एक शिक्षिका, बाहर से एक सुखी और व्यवस्थित जीवन जीती दिखती है। सुबह स्कूल जाना, शाम
1947 का बंटवारा। लाहौर से दिल्ली की ओर भागते शरणार्थियों की भीड़। भीषण हिंसा, खून और आग के बीच एक
सरिता, ४२ वर्षीय एक साधारण भारतीय महिला, पिछले बीस वर्षों से परिवार की हर खुशी, हर ज़रूरत और हर उम्मीद
प्राचीन मंदिरों की छायाओं में, राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में स्थित एक वीरान हवेली में छिपा है एक ऐसा राज़,
जब मंदिर की घंटियों की आवाज़ ने हवा को भर दिया, तो दुल्हन ने अचानक अपनी मांग में सिंदूर लगाने
जब आरती ने उस रात अपने बेडरूम के फर्श पर बिखरे कागजों और फटे फोटो को देखा, तो उसके सीने
कुछ रिश्ते अधूरे नहीं होते, बस टूटकर बिखर जाते हैं। वियाना आज भी उस आखिरी शाम को याद करती है