आदिवासियों की चीख
घने जंगल…ऊँचे पहाड़…नदियों की कलकल…और उन्हीं के बीच बसा था एक छोटा-सा आदिवासी गाँव महुआगढ़। यहाँ रहने वाले लोगों के […]
घने जंगल…ऊँचे पहाड़…नदियों की कलकल…और उन्हीं के बीच बसा था एक छोटा-सा आदिवासी गाँव महुआगढ़। यहाँ रहने वाले लोगों के […]
शादी को अभी सिर्फ़ तीन दिन हुए थे…पूरा परिवार नई बहू अनन्या के आने की खुशियों में डूबा था।लेकिन पहली
साल 1998…जब मोबाइल हर हाथ में नहीं था…और एक फोन कॉल…पूरे दिन की सबसे बड़ी खुशी होती थी। दिल्ली में
आज अपराधी बंदूक लेकर नहीं आते…वे सिर्फ़ एक लिंक भेजते हैं।एक फोन कॉल…एक OTP…एक नकली वेबसाइट…एक फर्जी नौकरी…एक झूठा प्यार…और
शहर से लगभग दस किलोमीटर दूर…घने जंगलों के बीच…एक टूटा हुआ पुल था…जिसे लोग वर्षों से “पुराना पुल” कहते थे।दिन
आज की मुंबई…गगनचुंबी इमारतों…लोकल ट्रेनों…फिल्मों…और करोड़ों सपनों का शहर है। लेकिन…हर चमकती सड़क के नीचे…एक ऐसा इतिहास दफन है…जिसे कभी
शहर के बाहर…बरसों पुराना शिवनगर रेलवे स्टेशन…दिन में बिल्कुल सामान्य दिखाई देता था। लेकिन…रात के ठीक 2:17 बजे…कुछ ऐसा होता
हर शादी…नई ज़िंदगी की शुरुआत होती है।लेकिन आरव मल्होत्रा और काव्या शर्मा के लिए…शादी का पहला सफर…मौत की उलटी गिनती
राजस्थान के वीरान गाँव चंद्रगढ़ में एक 500 साल पुरानी बावड़ी थी…जिसके बारे में कहा जाता था कि उसमें उतरने
हर अपराधी…खुद को बेगुनाह कहता है। लेकिन इस बार…एक बेगुनाह इंस्पेक्टर को अपराधी बना दिया गया। उत्तर प्रदेश के शहर