खामोश पड़ोसी
पुरानी दिल्ली की…एक शांत कॉलोनी।जहाँ…हर कोई…हर किसी को जानता था।कौन कब घर आता है…किसके घर कौन मेहमान आया…किसकी किससे लड़ाई […]
पुरानी दिल्ली की…एक शांत कॉलोनी।जहाँ…हर कोई…हर किसी को जानता था।कौन कब घर आता है…किसके घर कौन मेहमान आया…किसकी किससे लड़ाई […]
वीर प्रताप राठौर…एक ऐसा इंसान…जो रिश्तों को पैसे से ऊपर मानता था।उसका विश्वास था…कि सच्चे लोग कभी धोखा नहीं देते।लेकिन…एक
शहर के दो सबसे प्रतिष्ठित परिवार…चौहान और सिसोदिया…पिछले पच्चीस वर्षों से…एक-दूसरे का चेहरा तक देखना पसंद नहीं करते थे। किसी
पंद्रह साल पहले…एक चर्चित हत्या का मामला…पूरे देश की सुर्खियाँ बना था।अपराधी गिरफ्तार हुआ…अदालत ने फैसला सुनाया…और केस हमेशा के
शहर के पुराने हिस्से में…करीब सौ साल पुराना…एक डाकघर था…जो बीस साल पहले हमेशा के लिए बंद कर दिया गया
देश की सबसे प्रतिष्ठित अदालत…कोर्ट नंबर 1।यहीं…इतिहास बदलने वाले फैसले सुनाए जाते थे।लेकिन…इस बार…फैसला सिर्फ़ एक मुकदमे का नहीं था…बल्कि
दादाजी के निधन के बाद शर्मा परिवार को शहर के बाहरी हिस्से में बना करीब सौ साल पुराना एक विशाल
शहर से कुछ किलोमीटर दूर…घने जंगलों के बीच…एक पुरानी सड़क थी।दिन में…वह बिल्कुल सामान्य दिखाई देती थी।लेकिन…रात के बाद…उसका नाम
गाँव के बाहर…एक पहाड़ी पर बना था…करीब चार सौ साल पुराना मंदिर।दिन में…वहाँ श्रद्धालुओं की भीड़ रहती थी।लेकिन…सूरज ढलते ही…
कुछ राज़ दिन की रोशनी में नहीं…सिर्फ रात के सन्नाटे में सामने आते हैं। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी कस्बे देवगढ़