कर्म का आईना
कभी-कभी इंसान को बदला लेने की जरूरत नहीं पड़ती।वक़्त खुद गवाह बनता है।और कर्म अपने तरीके से जवाब देता है। […]
कभी-कभी इंसान को बदला लेने की जरूरत नहीं पड़ती।वक़्त खुद गवाह बनता है।और कर्म अपने तरीके से जवाब देता है। […]
राजस्थान की धरती पर बसा एक ऐसा गाँव जिसकी कहानी सुनकर आज की आधुनिक दुनिया भी हैरान रह जाती है।
दो शादियाँ टूट चुकी थीं।समाज ने फैसला सुना दिया था कि गलती उसी में होगी। रिश्तेदारों ने उसे मनहूस कहा।लोगों
एक नई बहू जब पुराने खानदान की चौखट पार करती है, तो उसे लगता है कि वह एक नए परिवार
कुछ रिश्ते दिल से बनते हैं…कुछ रिश्ते मजबूरी से।लेकिन क्या मजबूरी में बना रिश्ता कभी सच्चा बन सकता है? अविका,
कहते हैं कि वक्त के साथ रिश्ते कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत हो जाते हैं।लेकिन क्या सच में? नौ साल…नौ
नई-नवेली बहू वैदिशा एक ऐसे संयुक्त परिवार में आती है जहाँ वर्षों से एक ही नियम चलता आया है—”बहुएँ सिर्फ़
ज़िंदगी हर किसी को दूसरा मौका नहीं देती, लेकिन जब देती है, तो उसे स्वीकार करने का साहस हर किसी
भारत के एक दूरदराज़ पहाड़ी इलाके में स्थित एक रहस्यमयी गाँव “मातृग्राम” पूरे देश से अलग है। यहाँ सदियों से