वाराणसी… जहाँ हर गली एक कहानी सुनाती है। अस्सी घाट के पास एक छोटा-सा पुराना पुस्तकालय, जहाँ आर्यमान त्रिपाठी—एक संघर्षरत लेखक—अपनी पहली किताब के लिए प्रेरणा ढूँढ़ रहा था। उसी दिन उसे धूल से ढकी एक अधूरी पांडुलिपि मिलती है। जैसे-जैसे वह उसे पढ़ता है, उसे एहसास होता है कि उसमें लिखी घटनाएँ उसकी अपनी ज़िंदगी से अजीब तरह से मिलती-जुलती हैं। और उस पांडुलिपि के पीछे छिपा है बीस साल पुराना एक साहित्यिक अपराध, जिसने कई ज़िंदगियाँ बदल दी थीं।
All Chapters
- अध्याय 1 — अधूरी पांडुलिपि
- अध्याय 2 — लेखक का नाम
- अध्याय 3 — अस्सी घाट का सुराग
- अध्याय 4 — भूला हुआ पुस्तकालय
- अध्याय 5 — चोरी हुई कहानी
- अध्याय 6 — बीस साल पुराना सच
- अध्याय 7 — झूठा लेखक
- अध्याय 8 — आख़िरी गवाह
- अध्याय 9 — असली पांडुलिपि
- अध्याय 10 — सच का प्रकाशन
- अध्याय 11 — लेखक की पहचान
- अध्याय 12 — बनारस का लेखक
