खामोश सड़क
शहर से कुछ किलोमीटर दूर…घने जंगलों के बीच…एक पुरानी सड़क थी।दिन में…वह बिल्कुल सामान्य दिखाई देती थी।लेकिन…रात के बाद…उसका नाम […]
शहर से कुछ किलोमीटर दूर…घने जंगलों के बीच…एक पुरानी सड़क थी।दिन में…वह बिल्कुल सामान्य दिखाई देती थी।लेकिन…रात के बाद…उसका नाम […]
गाँव के बाहर…एक पहाड़ी पर बना था…करीब चार सौ साल पुराना मंदिर।दिन में…वहाँ श्रद्धालुओं की भीड़ रहती थी।लेकिन…सूरज ढलते ही…
कुछ राज़ दिन की रोशनी में नहीं…सिर्फ रात के सन्नाटे में सामने आते हैं। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी कस्बे देवगढ़
घने जंगल…ऊँचे पहाड़…नदियों की कलकल…और उन्हीं के बीच बसा था एक छोटा-सा आदिवासी गाँव महुआगढ़। यहाँ रहने वाले लोगों के
शादी को अभी सिर्फ़ तीन दिन हुए थे…पूरा परिवार नई बहू अनन्या के आने की खुशियों में डूबा था।लेकिन पहली
आज अपराधी बंदूक लेकर नहीं आते…वे सिर्फ़ एक लिंक भेजते हैं।एक फोन कॉल…एक OTP…एक नकली वेबसाइट…एक फर्जी नौकरी…एक झूठा प्यार…और
शहर से लगभग दस किलोमीटर दूर…घने जंगलों के बीच…एक टूटा हुआ पुल था…जिसे लोग वर्षों से “पुराना पुल” कहते थे।दिन
आज की मुंबई…गगनचुंबी इमारतों…लोकल ट्रेनों…फिल्मों…और करोड़ों सपनों का शहर है। लेकिन…हर चमकती सड़क के नीचे…एक ऐसा इतिहास दफन है…जिसे कभी
शहर के बाहर…बरसों पुराना शिवनगर रेलवे स्टेशन…दिन में बिल्कुल सामान्य दिखाई देता था। लेकिन…रात के ठीक 2:17 बजे…कुछ ऐसा होता
हर शादी…नई ज़िंदगी की शुरुआत होती है।लेकिन आरव मल्होत्रा और काव्या शर्मा के लिए…शादी का पहला सफर…मौत की उलटी गिनती