खामोशी की साज़िश
दस साल पहले…एक छोटे शहर में…एक ही रात में…चार लोगों की रहस्यमयी मौत हो गई।पुलिस ने…इसे हादसा मानकर…फाइल बंद कर […]
दस साल पहले…एक छोटे शहर में…एक ही रात में…चार लोगों की रहस्यमयी मौत हो गई।पुलिस ने…इसे हादसा मानकर…फाइल बंद कर […]
पुराने शहर की…एक भूली हुई लाइब्रेरी…जहाँ वर्षों से…कोई नहीं गया था।धूल से ढकी…टूटी हुई अलमारियों के बीच…नक्ष अरोड़ा को…एक काली
एक बारिश भरी शाम…रेलवे स्टेशन के प्लेटफ़ॉर्म नंबर पाँच पर…विहान अरोड़ा की नज़र…एक लड़की पर पड़ी।वह अकेली थी…भीगी हुई…डरी हुई…और
बारह साल पहले…एक प्रतिष्ठित परिवार…एक ही रात में बिखर गया। एक हत्या…एक कथित आत्महत्या…और अदालत का अंतिम फैसला।फाइल बंद हो
अन्वी राठौर…एक सफल आर्किटेक्ट…जिसकी ज़िंदगी बिल्कुल सामान्य थी।एक प्यार करने वाला परिवार…अच्छा करियर…और जल्द होने वाली शादी। लेकिन…एक सड़क दुर्घटना
पुरानी दिल्ली की…एक शांत कॉलोनी।जहाँ…हर कोई…हर किसी को जानता था।कौन कब घर आता है…किसके घर कौन मेहमान आया…किसकी किससे लड़ाई
पंद्रह साल पहले…एक चर्चित हत्या का मामला…पूरे देश की सुर्खियाँ बना था।अपराधी गिरफ्तार हुआ…अदालत ने फैसला सुनाया…और केस हमेशा के
बेंगलुरु… जहाँ IT की चमकती ऊँची इमारतों और बारिश की सड़कों के पीछे गहरे राज़ छुपे रहते हैं। राधिका शर्मा
शहर के पुराने हिस्से में…करीब सौ साल पुराना…एक डाकघर था…जो बीस साल पहले हमेशा के लिए बंद कर दिया गया
देश की सबसे प्रतिष्ठित अदालत…कोर्ट नंबर 1।यहीं…इतिहास बदलने वाले फैसले सुनाए जाते थे।लेकिन…इस बार…फैसला सिर्फ़ एक मुकदमे का नहीं था…बल्कि