Thriller

मोहब्बत... या साज़िश?

मोहब्बत… या साज़िश?

नैरा सिंह…प्यार पर…दोबारा भरोसा करना भूल चुकी थी।एक असफल रिश्ते ने…उसे भीतर तक तोड़ दिया था। फिर…उसकी ज़िंदगी में…अगस्त्य राजदेव […]

वो लड़की सिर्फ़ रात में दिखती थी

वो लड़की सिर्फ़ रात में दिखती थी

रात के…ठीक बारह बजे…पुराने रेलवे पुल पर…एक लड़की दिखाई देती थी।सफेद कपड़े…हाथ में पुरानी लालटेन…और…चेहरे पर…एक अजीब-सी मुस्कान। वह…हर रात…उसी

मेरी पत्नी का गुप्त अतीत

मेरी पत्नी का गुप्त अतीत

शादी को…सिर्फ़ सात महीने हुए थे।दक्ष को लगता था…उसकी ज़िंदगी अब पूरी हो चुकी है।आहाना…उसकी मुस्कान की वजह थी। लेकिन…एक

चेहरे के पीछे का कातिल

चेहरे के पीछे का कातिल

शहर में…आठ महीनों के भीतर…आठ हत्याएँ हो चुकी थीं।हर बार…लाश के पास…एक सफेद मुखौटा रखा मिलता था।ना उंगलियों के निशान…ना

एक ही इंसान... कई ज़िंदगियाँ

एक ही इंसान… कई ज़िंदगियाँ

दिल्ली…मुंबई…जयपुर…देहरादून…चार शहर…चार अलग नाम…चार अलग ज़िंदगियाँ…लेकिन…चेहरा…एक ही था। दिल्ली में…वह आदित्य मल्होत्रा था।मुंबई में…विवान अरोड़ा।जयपुर में…अर्जुन राठौड़।और…देहरादून में…समर्थ कपूर। हर

सात ताले, एक लाश

सात ताले, एक लाश

राजगढ़ हवेली…करीब सौ साल पुरानी…और…अपने सात लोहे के दरवाज़ों के लिए मशहूर।हर दरवाज़े पर…एक अलग ताला।हर चाबी…एक अलग सदस्य के

होटल रूम 309

होटल रूम 309

शहर का…सबसे पुराना…और सबसे आलीशान होटल।होटल ग्रैंड क्राउन। लेकिन…उसकी तीसरी मंज़िल पर…एक कमरा था…रूम 309। बीस सालों से…उस कमरे के

आधी रात की दुल्हन

आधी रात की दुल्हन

शहर से करीब पचास किलोमीटर दूर एक पुरानी सड़क थी।लोग कहते थे रात के बारह बजे वहाँ लाल जोड़े में

जिसने मुझे तोड़ा... मैंने उसकी दुनिया तोड़ दी

जिसने मुझे तोड़ा… मैंने उसकी दुनिया तोड़ दी

दस साल पहले…रुद्रांश देव…सब कुछ खो चुका था।उसका परिवार…उसका करियर…उसकी पहचान…सब कुछ…एक ऐसी साज़िश में…खत्म कर दिया गया…जिसका कोई सबूत…कभी

एक किताब... हज़ार सवाल

एक किताब… हज़ार सवाल

पुरानी शहर लाइब्रेरी…जहाँ वर्षों से…कोई नई किताब नहीं आई थी।एक दिन…इतिहास शोधकर्ता शौर्य वर्मा को…धूल से ढकी…बिना नाम वाली…एक पुरानी

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