इच्छाओं का कुआँ
अरावली की पहाड़ियों के बीच बसे सूर्यगढ़ गाँव में एक ऐसा कुआँ था जिसके पास सूर्यास्त के बाद कोई नहीं […]
अरावली की पहाड़ियों के बीच बसे सूर्यगढ़ गाँव में एक ऐसा कुआँ था जिसके पास सूर्यास्त के बाद कोई नहीं […]
दादा जी की…तेरहवीं भी पूरी नहीं हुई थी…कि घर के बाहर…एक काली कार आकर रुकी।उसमें से…सफेद बालों वाला…एक बुज़ुर्ग वकील
रात के…दो बजकर सत्रह मिनट हुए थे।राजधानी के सबसे सुरक्षित सरकारी आवास के बाहर…अचानक दर्जनों काली गाड़ियाँ आकर रुकीं।हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों
पिता की मृत्यु को…सिर्फ़ दस दिन हुए थे।परिवार अभी…उनके जाने के दुख से…उबर भी नहीं पाया था।तभी…बैंक से फोन आया।उनके
शहर की सबसे शांत कॉलोनी…एक सुबह…चीखों से गूंज उठी।व्यापारी राघव अरोड़ा अपने कमरे में मृत मिला।कमरे का दरवाज़ा अंदर से
पाँच साल पहले…अर्णव राजदेव ने…काव्या त्रिवेदी से कहा था—“अगर मैं लौटकर आया… तो हमारी कहानी पूरी होगी।”लेकिन…उसी रात…वह गायब हो
शहर के सबसे प्रतिष्ठित उद्योगपति…राजवीर मल्होत्रा की बेटी…आन्या की शादी पूरे शहर की सबसे चर्चित शादी बनने वाली थी।हज़ारों निमंत्रण-पत्र
सिंघानिया परिवार…देश के सबसे पुराने…और सबसे अमीर कारोबारी परिवारों में से एक था।अरबों की संपत्ति…कई फैक्ट्रियाँ…हज़ारों एकड़ ज़मीन…और…सदियों पुरानी हवेली।
बचपन से…हर रात…विवान चौधरी…एक ही सपना देखता था। एक पुराना रेलवे स्टेशन…बारिश…लाल छाता लिए…एक छोटी बच्ची…और…दूर खड़ा…एक सफेद कोट पहने
बरसों पुरानी…धूल से ढकी…एक काली डायरी…पुरानी हवेली के तहखाने से मिली।उसके पहले पन्ने पर…सिर्फ़ एक पंक्ति लिखी थी—“अगर तुम यह