गुप्त कारोबार
पिता की मृत्यु को…सिर्फ़ दस दिन हुए थे।परिवार अभी…उनके जाने के दुख से…उबर भी नहीं पाया था।तभी…बैंक से फोन आया।उनके […]
पिता की मृत्यु को…सिर्फ़ दस दिन हुए थे।परिवार अभी…उनके जाने के दुख से…उबर भी नहीं पाया था।तभी…बैंक से फोन आया।उनके […]
शहर की सबसे शांत कॉलोनी…एक सुबह…चीखों से गूंज उठी।व्यापारी राघव अरोड़ा अपने कमरे में मृत मिला।कमरे का दरवाज़ा अंदर से
पाँच साल पहले…अर्णव राजदेव ने…काव्या त्रिवेदी से कहा था—“अगर मैं लौटकर आया… तो हमारी कहानी पूरी होगी।”लेकिन…उसी रात…वह गायब हो
शहर के सबसे प्रतिष्ठित उद्योगपति…राजवीर मल्होत्रा की बेटी…आन्या की शादी पूरे शहर की सबसे चर्चित शादी बनने वाली थी।हज़ारों निमंत्रण-पत्र
बचपन से…हर रात…विवान चौधरी…एक ही सपना देखता था। एक पुराना रेलवे स्टेशन…बारिश…लाल छाता लिए…एक छोटी बच्ची…और…दूर खड़ा…एक सफेद कोट पहने
बरसों पुरानी…धूल से ढकी…एक काली डायरी…पुरानी हवेली के तहखाने से मिली।उसके पहले पन्ने पर…सिर्फ़ एक पंक्ति लिखी थी—“अगर तुम यह
नैरा सिंह…प्यार पर…दोबारा भरोसा करना भूल चुकी थी।एक असफल रिश्ते ने…उसे भीतर तक तोड़ दिया था। फिर…उसकी ज़िंदगी में…अगस्त्य राजदेव
बाईस साल पहले…एक पहाड़ी मेले में…आठ साल का…अभिमन्यु चौहान…अचानक गायब हो गया। पुलिस…रिश्तेदार…पूरा गाँव…उसे खोजता रहा।लेकिन…वह कभी नहीं मिला।समय बीतता
शादी को…सिर्फ़ सात महीने हुए थे।दक्ष को लगता था…उसकी ज़िंदगी अब पूरी हो चुकी है।आहाना…उसकी मुस्कान की वजह थी। लेकिन…एक
शहर में…आठ महीनों के भीतर…आठ हत्याएँ हो चुकी थीं।हर बार…लाश के पास…एक सफेद मुखौटा रखा मिलता था।ना उंगलियों के निशान…ना