Crime

एक ही इंसान... कई ज़िंदगियाँ

एक ही इंसान… कई ज़िंदगियाँ

दिल्ली…मुंबई…जयपुर…देहरादून…चार शहर…चार अलग नाम…चार अलग ज़िंदगियाँ…लेकिन…चेहरा…एक ही था। दिल्ली में…वह आदित्य मल्होत्रा था।मुंबई में…विवान अरोड़ा।जयपुर में…अर्जुन राठौड़।और…देहरादून में…समर्थ कपूर। हर […]

सात ताले, एक लाश

सात ताले, एक लाश

राजगढ़ हवेली…करीब सौ साल पुरानी…और…अपने सात लोहे के दरवाज़ों के लिए मशहूर।हर दरवाज़े पर…एक अलग ताला।हर चाबी…एक अलग सदस्य के

होटल रूम 309

होटल रूम 309

शहर का…सबसे पुराना…और सबसे आलीशान होटल।होटल ग्रैंड क्राउन। लेकिन…उसकी तीसरी मंज़िल पर…एक कमरा था…रूम 309। बीस सालों से…उस कमरे के

आधी रात की दुल्हन

आधी रात की दुल्हन

शहर से करीब पचास किलोमीटर दूर एक पुरानी सड़क थी।लोग कहते थे रात के बारह बजे वहाँ लाल जोड़े में

जिसने मुझे तोड़ा... मैंने उसकी दुनिया तोड़ दी

जिसने मुझे तोड़ा… मैंने उसकी दुनिया तोड़ दी

दस साल पहले…रुद्रांश देव…सब कुछ खो चुका था।उसका परिवार…उसका करियर…उसकी पहचान…सब कुछ…एक ऐसी साज़िश में…खत्म कर दिया गया…जिसका कोई सबूत…कभी

एक किताब... हज़ार सवाल

एक किताब… हज़ार सवाल

पुरानी शहर लाइब्रेरी…जहाँ वर्षों से…कोई नई किताब नहीं आई थी।एक दिन…इतिहास शोधकर्ता शौर्य वर्मा को…धूल से ढकी…बिना नाम वाली…एक पुरानी

खामोशी की साज़िश

खामोशी की साज़िश

दस साल पहले…एक छोटे शहर में…एक ही रात में…चार लोगों की रहस्यमयी मौत हो गई।पुलिस ने…इसे हादसा मानकर…फाइल बंद कर

अनजान लड़की का राज़

अनजान लड़की का राज़

एक बारिश भरी शाम…रेलवे स्टेशन के प्लेटफ़ॉर्म नंबर पाँच पर…विहान अरोड़ा की नज़र…एक लड़की पर पड़ी।वह अकेली थी…भीगी हुई…डरी हुई…और

अनसुना सच

अनसुना सच

बारह साल पहले…एक प्रतिष्ठित परिवार…एक ही रात में बिखर गया। एक हत्या…एक कथित आत्महत्या…और अदालत का अंतिम फैसला।फाइल बंद हो

खामोश पड़ोसी

खामोश पड़ोसी

पुरानी दिल्ली की…एक शांत कॉलोनी।जहाँ…हर कोई…हर किसी को जानता था।कौन कब घर आता है…किसके घर कौन मेहमान आया…किसकी किससे लड़ाई

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