Mystery

मोहब्बत... या साज़िश?

मोहब्बत… या साज़िश?

नैरा सिंह…प्यार पर…दोबारा भरोसा करना भूल चुकी थी।एक असफल रिश्ते ने…उसे भीतर तक तोड़ दिया था। फिर…उसकी ज़िंदगी में…अगस्त्य राजदेव […]

खोया हुआ भाई

खोया हुआ भाई

बाईस साल पहले…एक पहाड़ी मेले में…आठ साल का…अभिमन्यु चौहान…अचानक गायब हो गया। पुलिस…रिश्तेदार…पूरा गाँव…उसे खोजता रहा।लेकिन…वह कभी नहीं मिला।समय बीतता

वसीयत का सच

वसीयत का सच

दादा…ठाकुर हरिदेव सिंह…पूरे गाँव की सबसे सम्मानित शख्सियत थे।उनकी हवेली…सिर्फ़ एक घर नहीं…बल्कि…पूरे परिवार की पहचान थी। उनके निधन के

वो लड़की सिर्फ़ रात में दिखती थी

वो लड़की सिर्फ़ रात में दिखती थी

रात के…ठीक बारह बजे…पुराने रेलवे पुल पर…एक लड़की दिखाई देती थी।सफेद कपड़े…हाथ में पुरानी लालटेन…और…चेहरे पर…एक अजीब-सी मुस्कान। वह…हर रात…उसी

मेरी पत्नी का गुप्त अतीत

मेरी पत्नी का गुप्त अतीत

शादी को…सिर्फ़ सात महीने हुए थे।दक्ष को लगता था…उसकी ज़िंदगी अब पूरी हो चुकी है।आहाना…उसकी मुस्कान की वजह थी। लेकिन…एक

चेहरे के पीछे का कातिल

चेहरे के पीछे का कातिल

शहर में…आठ महीनों के भीतर…आठ हत्याएँ हो चुकी थीं।हर बार…लाश के पास…एक सफेद मुखौटा रखा मिलता था।ना उंगलियों के निशान…ना

खोया हुआ बेटा

खोया हुआ बेटा

पच्चीस साल पहले…एक धार्मिक मेले की भीड़ में…सिर्फ़ पाँच साल का…आर्यवीर सिंह…अचानक गायब हो गया।पूरे शहर में…उसकी तलाश हुई।पोस्टर लगे…इनाम

खामोश ज़िंदगी का शोर

खामोश ज़िंदगी का शोर

हर सुबह…अद्वैत शर्मा…समय पर ऑफिस जाता था।सबको मुस्कुराकर मिलता था।हर किसी की मदद करता था।लोग कहते थे…“इससे खुश इंसान हमने

एक ही इंसान... कई ज़िंदगियाँ

एक ही इंसान… कई ज़िंदगियाँ

दिल्ली…मुंबई…जयपुर…देहरादून…चार शहर…चार अलग नाम…चार अलग ज़िंदगियाँ…लेकिन…चेहरा…एक ही था। दिल्ली में…वह आदित्य मल्होत्रा था।मुंबई में…विवान अरोड़ा।जयपुर में…अर्जुन राठौड़।और…देहरादून में…समर्थ कपूर। हर

सात ताले, एक लाश

सात ताले, एक लाश

राजगढ़ हवेली…करीब सौ साल पुरानी…और…अपने सात लोहे के दरवाज़ों के लिए मशहूर।हर दरवाज़े पर…एक अलग ताला।हर चाबी…एक अलग सदस्य के

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