एक शादी… तीन राज़
जयपुर के ऐतिहासिक “राजमहल पैलेस” में…देश की सबसे चर्चित शादियों में से एक होने वाली थी।उद्योगपति आर्यवर्धन चौधरी की बेटी…अनन्या…और […]
जयपुर के ऐतिहासिक “राजमहल पैलेस” में…देश की सबसे चर्चित शादियों में से एक होने वाली थी।उद्योगपति आर्यवर्धन चौधरी की बेटी…अनन्या…और […]
दादा जी की…तेरहवीं भी पूरी नहीं हुई थी…कि घर के बाहर…एक काली कार आकर रुकी।उसमें से…सफेद बालों वाला…एक बुज़ुर्ग वकील
रात के…दो बजकर सत्रह मिनट हुए थे।राजधानी के सबसे सुरक्षित सरकारी आवास के बाहर…अचानक दर्जनों काली गाड़ियाँ आकर रुकीं।हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों
पिता की मृत्यु को…सिर्फ़ दस दिन हुए थे।परिवार अभी…उनके जाने के दुख से…उबर भी नहीं पाया था।तभी…बैंक से फोन आया।उनके
शहर की सबसे शांत कॉलोनी…एक सुबह…चीखों से गूंज उठी।व्यापारी राघव अरोड़ा अपने कमरे में मृत मिला।कमरे का दरवाज़ा अंदर से
पाँच साल पहले…अर्णव राजदेव ने…काव्या त्रिवेदी से कहा था—“अगर मैं लौटकर आया… तो हमारी कहानी पूरी होगी।”लेकिन…उसी रात…वह गायब हो
सौ साल पुरानी “राजमहल हवेली” हमेशा से सिर्फ़ एक घर नहीं थी।वह इस परिवार की पहचान थी।उसके आँगन में चार
शहर के सबसे प्रतिष्ठित उद्योगपति…राजवीर मल्होत्रा की बेटी…आन्या की शादी पूरे शहर की सबसे चर्चित शादी बनने वाली थी।हज़ारों निमंत्रण-पत्र
माँ के गुज़रे…बारह साल हो चुके थे।घर की दीवार पर…उनकी मुस्कुराती हुई…एक बड़ी तस्वीर टंगी थी। हर त्योहार…हर खुशी…हर दुख…उसी
सिंघानिया परिवार…देश के सबसे पुराने…और सबसे अमीर कारोबारी परिवारों में से एक था।अरबों की संपत्ति…कई फैक्ट्रियाँ…हज़ारों एकड़ ज़मीन…और…सदियों पुरानी हवेली।