अनसुना सच
बारह साल पहले…एक प्रतिष्ठित परिवार…एक ही रात में बिखर गया। एक हत्या…एक कथित आत्महत्या…और अदालत का अंतिम फैसला।फाइल बंद हो […]
बारह साल पहले…एक प्रतिष्ठित परिवार…एक ही रात में बिखर गया। एक हत्या…एक कथित आत्महत्या…और अदालत का अंतिम फैसला।फाइल बंद हो […]
अन्वी राठौर…एक सफल आर्किटेक्ट…जिसकी ज़िंदगी बिल्कुल सामान्य थी।एक प्यार करने वाला परिवार…अच्छा करियर…और जल्द होने वाली शादी। लेकिन…एक सड़क दुर्घटना
पुरानी दिल्ली की…एक शांत कॉलोनी।जहाँ…हर कोई…हर किसी को जानता था।कौन कब घर आता है…किसके घर कौन मेहमान आया…किसकी किससे लड़ाई
वीर प्रताप राठौर…एक ऐसा इंसान…जो रिश्तों को पैसे से ऊपर मानता था।उसका विश्वास था…कि सच्चे लोग कभी धोखा नहीं देते।लेकिन…एक
शहर के दो सबसे प्रतिष्ठित परिवार…चौहान और सिसोदिया…पिछले पच्चीस वर्षों से…एक-दूसरे का चेहरा तक देखना पसंद नहीं करते थे। किसी
पंद्रह साल पहले…एक चर्चित हत्या का मामला…पूरे देश की सुर्खियाँ बना था।अपराधी गिरफ्तार हुआ…अदालत ने फैसला सुनाया…और केस हमेशा के
बेंगलुरु… जहाँ IT की चमकती ऊँची इमारतों और बारिश की सड़कों के पीछे गहरे राज़ छुपे रहते हैं। राधिका शर्मा
शहर के पुराने हिस्से में…करीब सौ साल पुराना…एक डाकघर था…जो बीस साल पहले हमेशा के लिए बंद कर दिया गया
देश की सबसे प्रतिष्ठित अदालत…कोर्ट नंबर 1।यहीं…इतिहास बदलने वाले फैसले सुनाए जाते थे।लेकिन…इस बार…फैसला सिर्फ़ एक मुकदमे का नहीं था…बल्कि
दादाजी के निधन के बाद शर्मा परिवार को शहर के बाहरी हिस्से में बना करीब सौ साल पुराना एक विशाल